दहेज : यह इस देश के लगभग हर घर में दिखाई देगा और हर साल हजारों परिवारों को बर्बाद कर रहा है।

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जन्म लेना और पैसा कमाना और बच्चे पैदा करने के आलावा, आने वाली पीढ़ी के लिए एक बहतर समाज छोड़ जाना हम लोगो का सर्व प्रथम परिदायत्व है।
Image Source: DNA India
कुछ इस तरह इस देश मे किसी भी लड़की या लड़के की शादी की जाती है, शादी में पैसों की जरूरत है लेकिन लड़की की शादी में बहुत ज़्यादा पैसों की जरूरत होती हैं। क्योंकि ज़्यादातर लड़कियों की शादी 22 से 26 साल की उम्र में हो जाती है। और अभी आप कमाना भी शुरू नही करते, तो यह जिम्मेदारी माँ-बाप की हो जाती है,और अपनी सामाजिक इज्जत को बनाए ओर बचाएं रखने के लिए, घर की सारी FD तुड़वा कर पैसो और समानो से भरी आपकी यह शादी बड़ी धूमधाम से कराई जाती है। कुछ इस तरह समाज मे दहेज़ जन्म लेता है। इस देश मे हर साल 1 करोड़ से ज्यादा शादियां होती हैं, लगभग 99% प्रतिशत शादियों में खुले आम दहेज़ चलता हैं। दहेज़ के नाम पर बर्तन, चूल, संदुक, सिलाई मशीन, फर्नीचर, कूलर ,टी वी, और कई तोला शोना ओर बहुत मोटा कॅश (नगदी) बड़ी खुसी से लिया भी जाता हैं और दिया भी जाता हैं।
जन्म लेना और पैसा कमाना और बच्चे पैदा करने के आलावा, आने वाली पीढ़ी के लिए एक बहतर समाज छोड़ जाना हम लोगो का सर्व प्रथम परिदायत्व है।
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अगर आपकी हाइट (ऊँचाई) 5 फ़िट से कम है, तो संभव है कि एक अच्छे लड़के की बजाए, अच्छा खासा दहेज़ आपके दरवाज़े पर दस्तक दे चुका है। रंग सावला और शरीर बड़ा है, तो आप भी इस समाज की निर्विवाद उज्ज्वल श्रेणी (unwonted Bright category) में आ चुके हैं। शायद दहेज़ में एक बड़ी कार देने से आप इस समाज को अच्छे लगने लगों।
अगर आप जॉब (Job) करते हैं तो आपकी सैलरी आपका रिश्ता तय करेगी आप जॉब नही करते तो आपके पापा की सैलरी क्या है, अगर एक ही भाई है तो नज़र आपकी संपत्ति पर होगी और कोई बड़ी बहन है तो नज़र बराबरी के दहेज पर होगी। अमीर हो तो दिखावा, सर बड़े शान से उपर खड़ा होगा। अगर ग़रीब हैं तो मजबूरी चारों और नाच रही होंगी। लड़का कहा रहता हैं।लड़का कौन से धर्म का है, किस जाती का है, और जातियों में कौन सी जाती का है। लड़के ने कहा से अपनी पढ़ाई की है, लड़के का रंग केसा है और कितना कमा लेता है। यह सारी की सारी चीजें आपकी शादी में लगने वाले पैसो पर सीधा प्रभाव डालती है और गलती से डॉक्ट र या अच्छा इंजिनियर या फिर किसी सरकारी नौकरी वाला निकल गया। तो यह हमारा समाज किसी भी कीमत पर  शादी करने के लिए त्यार है किसी भी कीमत पर । यह उम्मीद की जाती है की शिक्षा किसी भी समाज में बदलाव् लाने के लिए सबसे उपयोजी शस्त्र है, लेकिन यहां तो जिस चीज को 1961 में गैरकानूनी करार कर दिया था। जिसकी वजह से देश में लाखो आत्मा हत्या हो रही थी। और इससे लाखो परिवार टूट भिखर गए थे। वो ही चीज अब इन पड़े लिखे परिवारों में सबसे ज्यादा हो रही है। तो आप ही मुझे बताओ की क्या ऐसी शिक्षा का और ऐसे पड़े लिखे इंसानो का ?
जन्म लेना और पैसा कमाना और बच्चे पैदा करने के आलावा, आने वाली पीढ़ी के लिए एक बहतर समाज छोड़ जाना हम लोगो का सर्व प्रथम परिदायत्व है।
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जन्म लेना और पैसा कमाना और बच्चे पैदा करने के आलावा, आने वाली पीढ़ी के लिए एक बहतर समाज छोड़ जाना हम लोगो का सर्व प्रथम परिदायत्व है। “अगर किसी समाज के पड़े लिखा इंसान सही गलत में फरक नहीं देख सकता, या उसके लिए आवाज नहीं उठा नहीं सकते। तो हमारे इस समाज का विनाश निश्चित है”

इस लेख को पड़ने के बाद एक बार अपने पापा से FD के बारे में और अपनी माँ से गोल्ड के बारे में जरूर पूछ लेना, तब तक आप इन शादियों में मज़बूरी और दिखावे के बिच नाचते रहो।

 

यह शब्द आलोक कुमार (Alok Kumar) जी के है।

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